सरे आम हिंदी चिट्ठों को लूट रहे हैं ये इंडियन बाबाजी

>> Sep 17, 2009

हिंदी बात के चिट्ठे से चुराया हुआ यह लेख विज्ञापनों के साथ

हिंदी बात के चिट्ठे से चुराया हुआ यह लेख विज्ञापनों के साथ

विज्ञापनों से भरे पड़े इस साइट पर हिंदी चिट्ठों की सामग्री थोक में उठा कर डाल दी गयी है और वो भी बिना किसी  लिंक या स्रोत की जानकारी के।

सरे आम हिंदी चिट्ठों को लूट रहे हैं ये इंडियन बाबाजी

http://indianbabaji.com/sanghanit-blog-aggregrator/

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13 comments:

Raviratlami September 17, 2009 4:22 PM  
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Shiv Kumar Mishra September 17, 2009 4:23 PM  

बाबाजी तो बड़े चमत्कारी लगते हैं. भाई, मन्त्र से तो नहीं लिख डाला सबकुछ? सारे मिलकर इन बाबाजी की मेगावाट लगाइए. चोर-उचक्कों को जूते, चप्पल वगैरह चुराने के लिए हनुमान जी का मंदिर काफी नहीं था क्या जो लेख चुराने में लग गए?

Raviratlami September 17, 2009 4:29 PM  
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संजय बेंगाणी September 17, 2009 5:16 PM  

जब प्रतिष्ठित साइटें लेख चुरा रही है, ये तो फिर भी फक्कड़ बाबा है....दुख की बात है.

हम तो फिलहाल प्रभात खबर वालों को चेताने में व्यस्त है. लगे हाथ इन्हे भी आँखे दिखा आते हैं...

अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi September 17, 2009 7:24 PM  

ये घोर, महाघोर ,महानतम घोर ( यदि ऐसा कुछ है तो)पाप है. मात्र आंखे तरेरने से नहीं बनेगी बात.

( किंतु इसके अतिरिक्त हम-आप कर ही क्या सकते हैं).
" आईना'दिखाने का धन्यवाद.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" September 17, 2009 7:35 PM  

बहुत पहुंचे हुए बाबा लगते हैं!!
शिव मिश्र जी का कहना बिल्कुल सही है कि इन लोगों की वाट(चाहे कोई भी वाट हो) पर जरूर लगनी चाहिए:)

अजय कुमार झा September 17, 2009 11:07 PM  

ये बाबा लोग आज कल पार्ट टाईम काम में कई इसी तरह के चमत्कार कर रहे हैं..कमाल है कितने इनोवेटिव टाईप हो गये हैं..

Anil Pusadkar September 18, 2009 12:34 AM  

बाबा नाम से ही लग गया था ये संजू बाबा टाईप का लफ़्डेबाज़ होयेंगा।

Alok Nandan September 18, 2009 10:41 AM  

बाबा जी हिंदी के प्रचार प्रसार में लगे हैं.....और हिंदी से अच्छी कमाई भी कर रहे हैं...भले ही माल कही से टिप रहे हो...हिंग लगे न फिटकरी रंग चढ़े चोखा वाला मामला है...भारत की बाबागिरी परंपरा को ही आगे बढ़ा हैं बाबा जी...बाबा जी की जय हो

Suresh Chiplunkar September 18, 2009 10:51 AM  

वाकई में बहुत बड़ा चोट्टा लगता है ये बाबा तो, किसी भी लेख में मूल लेखक का नाम तक नहीं दिया है… इस साकल्ले को कैसे घसीटना है यह सोचा जाये…। फ़िलहाल मेरा एक भी चिठ्ठा वहाँ नहीं है…। एक बार ये मेरा चिठ्ठा चुराये, फ़िर इस संजू बाबा की ठुकाई की सुपारी मैं देता हूं…

रमण कौल September 18, 2009 6:29 PM  

मज़ा तब आए जब बाबाजी का संकलक इस पोस्ट को भी अपनी साइट पर छाप दे।

Raviratlami September 18, 2009 11:05 PM  

इंडियन बाबाजी के अनुरोध पर उनका व्यक्तिगत जानकारी जो मेरी पहले की दो टिप्पणियों में दर्ज थी वो टिप्पणी मैंने हटा दी है. (वैसे ये जानकारी डोमेनटूल्स के जरिए इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, और वहीं से कॉपी पेस्ट की गई थी.)

हिमांशु । Himanshu September 19, 2009 6:37 AM  

अब लिंक पर जायेंगे तो यह संदेश पायेंगे - "This Blog was taken offline by Infovinity. We regret any inconvenience caused by the users of this Blog.Please contact us at contact@infovinity.com for any questions"

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