आईये इस दुनिया को छू कर देखें
अक्सर लोग यह गलत मानते हैं कि नेत्रहीन होना यानि बहुत सी चीजों से वंचित होना होता है। वास्तव में ऐसा नहीं है। हाथों के साथ पढ़ने का आनंद, कानों से देखना, और उस हर चीज को महसूस करना जिसे देखा जा सकता है। नेत्रों की कमी उनकी छूने और सुनने की प्रतिभा को विलक्षण बना देती है। ईशा प्रयास है इन विलक्षण प्रतिभाओं को निखारने का, इन्हें और चमकाने का, दुनिया को नेत्रहीनों के लिये एक बेहतर जगह बनाने का।
कुछ कुछ यही लिखा है नेत्रहीनों के लिये काम करने वाली इस संस्था ईशा की व्रेबसाईट पर। अपने पिछले पोल में हमनें इसी संस्था के बारे में आपसे पूछा था।
ईशा प्रयास है नेत्रहीनों की दुनिया को बेहतर बनाने का।
क्या आपने कभी सोचा है कि केवल छू कर और सुन कर यह दुनिया कैसी लगती होगी? यदि इस स्पर्श का एहसास आपको भी छू जाता है तो आप भी सहायता कर सकते हैं:
- ईशा के बारे में लोगों को बता कर या इस पर एक ब्लॉग पोस्ट लिख कर।
- अपने विजि़टिंग कार्ड ब्रेल में बनवा कर (इसके लिये यहां संपर्क कर सकते हैं।)
- एक ब्रेल ग्रिटिंग कार्ड उसको भेज कर जिसे कभी कोई ग्रीटिंग कार्ड ना मिला हो!
3 comments:
बहुत बार महसूस करने की कोशिश की है.. इतनी हिम्मत पता नहीं मैं अपने में ले पता या नहीं.. पर दुआ में एक हाथ जरुर उठा सकता हूँ..
ईशा-नमन करता हूँ इस साधुवादी प्रयास को!!
sundar prayas ko naman.........
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