खुश भैया और डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़

“नमस्कार बड़े भैया, मैं डेमोक्रेसी का ‘अमर’ जुगाड़।”

 

“व्हाट जुगाड़?”

 

“जुगाड़ माने यदि सरकार अल्पमत में आ जाये तो हम अतिरिक्त साँसदों का जुगाड़ करवा देते हैं।

यदि आपको भी कभी ट्रस्ट वोट के लिये साँसदो का जुगाड़ करना हो तो बतायें। एस पी तो क्या बीएसपी से भी जुगाड़ करवा देंगे।”

 

“नो नो थैंक्यू, वी डोंट आऊटसोर्स आवर डेमोक्रेसी।”

 

“अच्छा बड़े भैया, आप तो सारी दुनिया के बड़े भैया हो, मेरे एक छोटे भाई हैं, उनके एक बड़े भाई हैं, क्या आप उन दोनो के झगड़े को सुलटा देगे?”

 

“यु सी, वी आर आलरेडी अगेज़्ड इन द गल्फ़। वी हैव ए बिगर इमेज। हाम छोटे मोटे घरेलू झगड़ों में टाँग नैइ अड़ाता।

वट आर यू डुइंग अबाउट रीसेंट अटैक्स ऑन यु्अर सिटीस बाय टेरर…”

 

(पूरी बात सुने बिना बोल पड़ते हैं) “हम एक एक अटैक का जवाब देगे। एक बार सॉफ्ट भैया को होम मिनिस्टर बन जाने दीजिये, फिर देखिये कैसे बहन जी का मुकाबला करते हैं। उनके सारे केस फिर से खुलवा देंगे। उनकी लगवायी सारी मूर्तियों पर बुलडोज़र चलवा देंगे। आखिर हम हैं डेमोक्रेसी के “अमर” जुगाड़।”