धुरविरोधी से एक अपील
आज्ज आखां धुरविरोधी नूं कित्थे कब्रां विचों बोल
और आज अपने चिट्ठे का आईडी पासवर्ड खोल
इक हटा था चिट्ठा नारद से, तुने लिख लिख मारे पोस्ट
आज सैंकड़ों चिट्ठे बाहर हैं, देखें तेरी ओर,
उठ दर्दमंदो के दोस्त, उठ देख अपना ब्लॉगवाणी,
जहां कुछ ही चिट्ठे छाये रहें, बाकियों की न दिखे कोई निशानी।
(हिंदी टूलबार पिटारा के चिट्ठे को ब्लॉगवाणी पर जोड़ने के लिये कई इमेल और फोन किये गये मगर न तो चिट्ठा जुड़ा और न ही कोई जवाब मिला)
(अमृता प्रीतम से क्षमा याचना सहित)