एक शहर

>> May 30, 2008

एक शहर - अमृता प्रीतम

 

1.

अस्पताल के दरवाजे पर

हक, सच, ईमान और कद्रें,

जाने कितने ही लफ्ज़ बीमार पड़े हैं

इक भीड़ सी इकट्ठी हो गयी है,

 

जाने कौन नुस्खा लिखेगा

जाने यह नुस्खा लग जायेगा,

लेकिन अभी तो ऐसा लगता है

इनके दिन पूरे हो गये...

2.

इस शहर में एक घर

घर कि जहां बेघर रहते हैं

जिस दिन कोई मजदूरी नहीं मिलती

उस दिन वे परेशान रहते हैं

 

बुढ़ापे की पहली रात

उनके कानों में धीरे से कह गयी

कि शहर में उनकी

भरी जवानी चोरी हो गयी....

 

3.

कल रात बला की सर्दी थी

आज सुबह सेवा समिति को

एक लाश सड़क पर पड़ी मिली है

नाम व पता कुछ भी मालूम नहीं

 

शमशान में आग लग रही है

लाश पर रोने वाला कोई नहीं

या तो कोई भिखारी मरा होगा

या शायद कोई फलसफ़ा मर गया....

 

4.

किसी मर्द के आगोश में-

कोई लड़की चीख उठी

जैसे उसके बदन से कुछ टूट गिरा हो

 

थाने में एक कहकहा बुलंद हुआ

कहवाघर में एक हंसी बिखरी

सड़कों पर कुछ हॉकर फिर रहे हैं

एक एक पैसे में खबर बेच रहे हैं

बचा खुचा जिस्म फिर से नोच रहे हैं....

 

5.

गुलमोहर के पेड़ों तले

लोग एक दूसरे से मिलते हैं

जोर से हंसते हैं गाते हैं

एक दूसरे से अपनी अपनी

मौत की खबर छुपाना चाहते हैं

संगमरमर कब्र का तावीज है

हाथों पर उठाये उठाये फिरते हैं

और अपनी लाश की हिफाजत कर रहे हैं....

6.

दिल्ली इस शहर का नाम है

कोई भी नाम हो सकता है ( नाम में क्या रखा है)

भविष्य का सपना रोज रात को

वर्तमान की मैली चादर

 

आधी ऊपर ओढ़ता है

आधी नीचे बिछाता है

कितनी देर कुछ सोचता है, जागता है,

फिर नींद की गोली खा लेता है.....

 

इससे जुड़ीं अन्य प्रविष्ठियां भी पढ़ें


14 comments:

समीर लाल May 30, 2008 3:20 AM  

आभार अमृता प्रीतम जी की रचनाऐं पेश करने का.

ranjanabhatia May 30, 2008 3:25 AM  

वाह बहुत अच्छी है यह तो ..यह मुझसे कैसे चुक गई पढने से :) शुक्रिया इसको यहाँ शेयर करने के लिए

balkishan May 30, 2008 2:02 PM  

अमृता प्रीतम जी को पढने का आनंद ही कुछ और है.
और की उम्मीद मे आपको धन्यवाद.

आलोक May 30, 2008 5:49 PM  

कविता अपन को समझ नहीं आती। या शायद उसके लिए खास दिमागी माहौल में पहले आना ज़रूरी है!

How do we know June 4, 2008 7:30 PM  

मैने ये पहले नही पढी है... आप को कहां से मिली?
इसे यहा लाने के लिये, बहुत बहुत शुक्रिया!!

How do we know June 4, 2008 8:11 PM  

धन्यवाद! अब शुरु होगी इस किताब को पाने की कोशिश!

I Me My June 5, 2008 6:59 AM  

Would there be a translation online?

I Me My June 6, 2008 7:05 AM  

Thanks for the translation!

adi June 18, 2008 3:17 AM  

have read this one before, from the collection of poems mentioned above
thanks for sharing it with so many people out here
hope u won't mind, me typing this out in english
regards,
- adi

Deeps June 23, 2008 9:28 AM  

vadhiya collection hai...
kuch lines maine suni thi leking jyada ansuni hain..
thanks !!

Adnan July 3, 2008 10:41 AM  

Umda nazmein haiN...tashakkur

livemalayalam September 6, 2008 11:00 PM  

धन्यवाद , यह एक उपयोगी पोस्ट

मलयालम रहते हैं

om arya June 29, 2009 9:32 PM  

itani achchhi kawita hai ki ...................dil ko choote huye fail gayee man ke gaharaaeyo me kahi.............bahut sundar

Post a Comment

  © Blogger template Werd by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP