कैसे लिखी मोबाइल से हिंदी

How to write Hindi on Mobile


3110ad.JPG


अब यह पता नहीं मोबाइल (Mobile) की छोटी स्क्रीन के कारण था या पोस्ट लिखने की उतावली थी कि मोबाइल (Mobile) से हिँदी (Hindi)  मेँ लिखी पहली पोस्ट पर फोन का मॉडल 3110 के स्थान पर 3310 लिखा गया। वास्तव में यह नोकिया का 3110 क्लासिक फोन है। मगर मुझे पता चला है कि नोकिया के सभी नये फोन अब इस सुविधा से युक्त हैं।

वास्तव में  हिंदी (Hindi) एसएमएस लिखने की सुविधा का प्रयोग मैंने मोबाइल (Mobile)  के ब्राउजर में जा कर अपना चिट्ठा लिखने के लिये किया।

वैसे तो वर्डप्रैस http://m.wordpress.comपर आपको मोबाइल (Mobile) से पोस्ट करने की सुविधा देता है और अंग्रेजी में मोबाइल से पोस्ट करना बहुत ही आसान है। मगर वर्डप्रैस की इस मोबाइल साइट पर हिंदी (Hindi) में पोस्ट लिख कर जब पब्लिश का बटन दबाया तो मेरे मोबाइल ने unknown response दिखा दिया। इसके बाद मैंने मोबाइल पर ही वर्डप्रैस की साइट पर जा कर जैसे कंप्यूटर पर पोस्ट लिखते हैं वैसे ही पोस्ट लिखी और पब्लिश कर दी। पोस्ट पब्लिश हो गयी। मुझे मोबाइल पर दोबारा टाइप नहीं करना पड़ा क्योंकि पहले वाली जगह से ही मैंने टैक्स्ट को कापी कर लिया था। नोकिया का यह मोबाइल यूनिकोड समर्थित है तथा सभी यूनुकोड साइट्स को हिंदी में बहुत अच्छे से दिखाता है।

अब बतायें आपको टाइपिंग के बारे में। मुझे फिर से ’क ख ग ’ याद करना पड़ा। कूंजियां कुछ इस तरह हैं:


 


1 = ँ ं ः  1 । . , ? !

2= अ आ इ ई उ ऊ ऋ 2

 3= ए ऐ ओ औ आँ 3

4= क ख ग घ डं 4


5= च छ ज झ ञ  5


6= ट ठ ड ढ ण 6


7= त थ द ध न 7


8= प फ ब भ म 8


9 = य र ल व श ष स ह ळ क्ष ज्ञ 9


इसमें हिंदी के अलावा आठ अन्य भारतीय भाषाओं की टाइपिंग संभव है तथा सभी भाषाओं के लिये कूंजी सहायता कार्ड  जो कि पर्स में आराम से रखा जा सकता है मिलता है। यदि आप उस पोस्ट को ध्यान से देखें तो टाइप करने में ’हिंदी" के स्थान पर मुझसे हिँदी लिखा गया और ’मे’ की बिंदी शुन्य जैसी लगती है।

बाकी जैसा कि आपने रिलायंस फोन के एक विज्ञापन में भी देखा होगा कि जहां पानी न हो, जमीन न हो, रोशनी न हो, मोबाइल का नेटवर्क तो होता ही है। तो  अब आप जहां कहीं से  भी अपना चिट्ठा (Blog)  तो लिख ही सकते हैं।


अब हिंदी में भी आती हैं चेन इमेल

अंग्रेजी में इस तरह की चेन इमेल तो सभी को आती होंगी जिसमें कोई सूचना, मजेदार फोटो या चुटकुले होते हैं। हिंदी की एक चेन इमेल आज मुझे प्राप्त हुई। यह बात साबित करती है कि हिंदी टाइपिंग और हिंदी इंटरनेट पर बहुत तेजी से प्रचलन में आ रही है। यहां यह स्पष्ट करदूं कि यह मेल मुझे किसी हिंदी चिट्ठाकार ने नहीं भेजी है और इसमें शामिल सैंकड़ों इमेल पतों से यह पता चलता है कि मेल काफी लंबा सफर तय करके आयी है।
मेरी पिछली पोस्ट से आपको पता चल गया होगा कि अब मोबाइल से हिंदी चिट्ठा पोस्ट करना भी संभव हो गया है। इसके बारे में विस्तार से अगली पोस्ट में लिखा जायेगा। तब तक आप चेन मेल में मिले इस चुटकुले का मजा लीजिये:

एक दिन राजू के पापा एक रोबोट ले कर आये.

वह रोबोट झूठ पकड़ सकता था और झूठ बोलने वाले को गाल पर खीँच कर चांटा मार देता था.

आज राजू स्कूल से घर देर से आया था... पापा ने पूछा "घर लौटने में देर क्यो हो गयी?"

"आज हमारी एक्स्ट्रा क्लासेस थी" राजू ने जवाब दिया...

रोबोट अचानक अपनी जगह से उछला और जमकर राजू के गाल पर चांटा मार दिया.

पापा हंसकर बोले, "ये रोबोट हर झूठ को पकड़ सकता है और झूठ बोलने वाले को चांटा भी मारता है. अब सच क्या है यह बताओ... कहाँ गए थे?"

"में फिल्म देखने गया था" राजू बोला

"कौन सी फिल्म?" पापा ने कड़ककर पूछा

"हनुमान"
चटाक... अभी राजू की बात पूरी भी नहीं हुई थी की उसके गाल पर रोबोट ने एक जोर का चांटा मारा.

"कौन सी फिल्म?" पापा ने फिर पूछा

"कातिल जवानी."

पापा ग़ुस्से में बोले "शर्म आनी चाहिए तुम्हे. जब में तुम्हारे जितना था तब ऐसी हरकत नहीं किया करता था."

चटाक... रोबोट ने एक चांटा मारा... इस बार पापा के गाल पर.

यह सुनते ही मम्मी किचन में से आते हुए बोली "आख़िर तुम्हारा बेटा है ना... झूठ तो बोलेगा ही"

अब मम्मी की बारी थी... चटाक...


मोबाइल से हिँदी मेँ लिखी पहली पोस्ट

यह दुनिया मेँ मोबाइल से हिँदी मेँ लिखी गयी पहली चिट्ठा पोस्ट है। इसे मैँने अपने नये नोकिया 3110 से लिखा है।


डिड यू मीन ’रवि रतलामी’

आपको याद होगा कि एक बार जब मैंने हिंदी के कुछ चिट्ठाकारों के नाम गूगल पर हिंदी में  सर्च किये तो ये नाम गूगल पर शाहरुख और अमिताभ से भी ज्यादा बार नजर आते थे।  वह पोस्ट यहां है।

जहां चिट्ठाकारों की ख्याति ज्यादा है अमिताभ और शाहरुख से

अब आपको आज की बात बताते हैं। आज आइबीएन चैनल rr.jpgrr.jpgपर एक समाचार रिपोर्ट देखी जिसमें रोहतक और अलवर में इंटेरनेट के प्रयोग के बारे में बताया गया था। मुझे याद आया कि ऐसी ही रिपोर्ट हमारे रवि जी जो कि रतलाम  में रहते हैं और रवि रतलामी के नाम से जाने जाते हैं को ले कर भी आइबीएन चैनल ने बनायी थी। मैंने सोचा शायद इस रिपोर्ट को आइबीएन चैनल ने अपनी साईट पर डाल दिया हो। तो यही सोच कर मैंने गूगल पर Ravi Ratlam सर्च किया। जानते हैं गूगल बाबा ने क्या पूछा? 

Did you mean: Ravi Ratlami  

रवि जी आपको अब गूगल का सर्च इंजिन भी पहचानता है।

 



जांच प्रविष्टी

जांच प्रविष्टी - कृप्या इग्नोर करें।


मेरी पसंद के चिट्ठे

”की जाणां मैं कौण” ने  चिट्ठाकारी के टैगिंग के खेल में  हमारे चिट्ठे का नाम दे कर बताया कि आईना पर लिखा उन्हें पसंद आता है। उनका बहुत बहुत धन्यवाद। उनसे इस तरह की तारीफ पहले भी मिलती रही है।  की जाणां मैं कौण एकमात्र ऐसा अंग्रेजी का गैरतकनीकि चिट्ठा है जिसे मैं नियमित रूप से पढ़ता हूं।

इनकी छोटी छोटी पोस्ट अक्सर दिल को छू जाती हैं।

आधुनिक सोच के साथ साथ उनके जैसी संवेदनशीलता बहुत कम देखने को मिलती है।

अमीर खुसरो और बुल्ले शाह जैसे सूफी गीतकारों पर इनकी समझ गज़ब की है।

आगामी सोमवार को होने वाली सर्जरी के लिये इनको शुभकामनाएं।

 इसके अलावा पिछले दिनों समीर लाल जी ने एक मेल भेज कर बताया कि आईना उनके पिता जी का प्रिय चिट्ठा है। यकीन मानिये यह मेल मेरे लिये किसी भी अवार्ड से कम नहीं था। अब यह बात मैं अपनी तारीफ की वजह से नहीं लिख रहा हूं यह बताने के लिये लिख रहा हूं कि यह समीर जी का बड़प्पन था कि उन्हों ने समय निकाल कर वह विशेष मेल मुझे भेजा।

अब खेल को आगे बढ़ाते हुए मुझे भी चार नाम देनें हैं। सिर्फ चार? साइडबार में पूरी लिस्ट लगी है फिर भी यह नाम हैं जो पहली बार में ही दिमाग में आते हैं:

 1. फुरसतिया: इनकी मजेदार लेखनी के बारे में तो आप सब जानते ही हैं। जब से चिट्ठाकारी में आया इनका लिखा हर लेख और चिट्ठाचर्चा पढ़े।  अनूप जी आपना लिखा तो पोस्ट करते ही हैं, जब भी कोइ दूसरों की लिखी रचना जो कि इन्हें लगे कि सभी को पढ़नी चाहिये उसे भी पोस्ट करते हैं। इसके अलावा दूसरों को लिखने की प्रेरणा भी देते रहते हैं।

2. उड़न तश्तरी : यानी समीर लाल जी। खूब अवार्ड जीत चुके हैं चिट्ठाकारी में। कवि हैं। हंसाते भी खूब  हैं। मगर मुझे और भी ज्यादा मजा आता है जब यें गंभीर लेख लिखते हैं फिर वो चाहे एक मामूली चिड़िया के बारे में हो, पड़ोस की किसी रुकमणी माई के बारे में या मन में आते कई सारे विचारों के बारे में।

3. रवि रतलामी का हिंदी ब्लॉग : रवि जी नियमित लिखते हैं। उनका एक क्लासिक स्टाइल है लिखने का। कभी कभी कुछ चुलबुला कभी गंभीर। जानकारी और अनुभव से भरपूर।


 4. मेरा पन्ना: जीतू भाई का अलग ही स्टाइल है लिखने का। शरारती सा स्टाइल। किसी भी विषय पर वे लिख लेते हैं और उसमें हास्य का पुट भी डाल देते हैं। पिछले दिनों दिल्ली में इनसे मुलाकात हुई तो एक पल के लिये भी नहीं लगा कि पहली बार मिल रहे हैं।


 मैं चाहता हूं कि इस खेल को आगे बढ़ाया जाये और जिनका नाम लिखा है वे भी अपने चार मनपसंद चिट्ठों के बारे में  जरूर लिखे। फुरसतिया जी खास खयाल रखें कि सिर्फ चार लिखने हैं। ;)