मेरी पसंद के चिट्ठे

”की जाणां मैं कौण” ने  चिट्ठाकारी के टैगिंग के खेल में  हमारे चिट्ठे का नाम दे कर बताया कि आईना पर लिखा उन्हें पसंद आता है। उनका बहुत बहुत धन्यवाद। उनसे इस तरह की तारीफ पहले भी मिलती रही है।  की जाणां मैं कौण एकमात्र ऐसा अंग्रेजी का गैरतकनीकि चिट्ठा है जिसे मैं नियमित रूप से पढ़ता हूं।

इनकी छोटी छोटी पोस्ट अक्सर दिल को छू जाती हैं।

आधुनिक सोच के साथ साथ उनके जैसी संवेदनशीलता बहुत कम देखने को मिलती है।

अमीर खुसरो और बुल्ले शाह जैसे सूफी गीतकारों पर इनकी समझ गज़ब की है।

आगामी सोमवार को होने वाली सर्जरी के लिये इनको शुभकामनाएं।

 इसके अलावा पिछले दिनों समीर लाल जी ने एक मेल भेज कर बताया कि आईना उनके पिता जी का प्रिय चिट्ठा है। यकीन मानिये यह मेल मेरे लिये किसी भी अवार्ड से कम नहीं था। अब यह बात मैं अपनी तारीफ की वजह से नहीं लिख रहा हूं यह बताने के लिये लिख रहा हूं कि यह समीर जी का बड़प्पन था कि उन्हों ने समय निकाल कर वह विशेष मेल मुझे भेजा।

अब खेल को आगे बढ़ाते हुए मुझे भी चार नाम देनें हैं। सिर्फ चार? साइडबार में पूरी लिस्ट लगी है फिर भी यह नाम हैं जो पहली बार में ही दिमाग में आते हैं:

 1. फुरसतिया: इनकी मजेदार लेखनी के बारे में तो आप सब जानते ही हैं। जब से चिट्ठाकारी में आया इनका लिखा हर लेख और चिट्ठाचर्चा पढ़े।  अनूप जी आपना लिखा तो पोस्ट करते ही हैं, जब भी कोइ दूसरों की लिखी रचना जो कि इन्हें लगे कि सभी को पढ़नी चाहिये उसे भी पोस्ट करते हैं। इसके अलावा दूसरों को लिखने की प्रेरणा भी देते रहते हैं।

2. उड़न तश्तरी : यानी समीर लाल जी। खूब अवार्ड जीत चुके हैं चिट्ठाकारी में। कवि हैं। हंसाते भी खूब  हैं। मगर मुझे और भी ज्यादा मजा आता है जब यें गंभीर लेख लिखते हैं फिर वो चाहे एक मामूली चिड़िया के बारे में हो, पड़ोस की किसी रुकमणी माई के बारे में या मन में आते कई सारे विचारों के बारे में।

3. रवि रतलामी का हिंदी ब्लॉग : रवि जी नियमित लिखते हैं। उनका एक क्लासिक स्टाइल है लिखने का। कभी कभी कुछ चुलबुला कभी गंभीर। जानकारी और अनुभव से भरपूर।


 4. मेरा पन्ना: जीतू भाई का अलग ही स्टाइल है लिखने का। शरारती सा स्टाइल। किसी भी विषय पर वे लिख लेते हैं और उसमें हास्य का पुट भी डाल देते हैं। पिछले दिनों दिल्ली में इनसे मुलाकात हुई तो एक पल के लिये भी नहीं लगा कि पहली बार मिल रहे हैं।


 मैं चाहता हूं कि इस खेल को आगे बढ़ाया जाये और जिनका नाम लिखा है वे भी अपने चार मनपसंद चिट्ठों के बारे में  जरूर लिखे। फुरसतिया जी खास खयाल रखें कि सिर्फ चार लिखने हैं। ;)



11 comments:

विपुल जैन September 2, 2007 12:06 AM

मुबारक,

अच्छा सिलसिला शुरू किया है

अनूप शुक्ल September 2, 2007 12:25 AM

बड़ा मुश्किल में डाल दिया। ये राशनिंग अच्छी बात नहीं! आपके और अपने अलावा किसका नाम लूं? दो बार लिख दूं कि आपका ब्लाग अच्छा लगता है, दो बार अपना लिख दूं। चार हो गये? हमारा ब्लाग पसंद करने के लिये शुक्रिया। :) अपना भी करें।

sanjay bengani September 2, 2007 1:06 AM

हमारी लिस्ट तो लम्बी है, क्या करें?

श्रीश शर्मा September 2, 2007 12:24 PM

भई हमारे पसंदीदा चिट्ठों की तो लंबी सूची है, उसमें से चार कैसे छांटें? -)

deepanjali September 5, 2007 11:27 PM

जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.

Raj Yadav September 8, 2007 7:28 PM

bahut achha likha hai aapne.nice..

जीतू September 9, 2007 6:00 PM

अच्छा शुरु किए हो प्रभु, लेकिन चार मुर्गे फांसो भी, तभी तो खेल आगे बढेगा। लेख के अंत मे चार बन्दों के नाम भी डालो और उन्हे व्यक्तिगत रुप से इन्फार्म भी करो, कि लो भाई, अब तुम्हारी बारी।

हम भी लिखेंगे लेकिन एक दो दिन रुक कर।

जगदीश भाटिया September 10, 2007 2:22 AM

जीतू भाई,
चार नाम जो दिये हैं वही नाम हैं खेल को आगे बढ़ाने के लिये यानी आपको, अनूपजी को, समीर जी को और रवि जी को अपनी पसंद के चार चिट्ठे लिखने हैं।

जीतू September 10, 2007 3:14 AM

वो बात तो ठीक है जगदीश भाई,
लेकिन इसमे एक् पंगा है, मान लीजिए, मेरी लिस्ट फुरसतिया भी शामिल है तो फिर जनाब चार मे से एक बन्दा तो कम हो जाएगा ना...
इसलिए चार लोग, जिनके बारे मे लिखा गया है, उसके अतिरिक्त चार और् लोगो को भी पकड्ना चाहिए।

समीर लाल September 10, 2007 1:23 PM

आभार के साथ यह भी बताता चलूँ कि बड़ी गंभीर समस्या में डाल दिया सिर्फ चार का कोटा लगा कर. :)

adi September 12, 2007 11:28 PM

agar aap kabhi delhidreams par bhi aayein to humein accha lagega :)

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