चिट्ठा हिट करने के 20 नुस्खे

आज पेश हैं चिट्ठों को हिट करने के आजमाये हुए नुस्खे।

चेतावनी: इन नुस्खों का प्रयोग चिट्ठाकार अपने रिस्क पर करें। किसी भी प्रकार के सामाजिक, आर्थिक, अथवा मानसिक नुकसान के लिये लेखक किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं है। आपको इन नुस्खों पर भरोसा नहीं तो लेखक को पत्र लिखें या मिलें. नाम गुप्त रखे जाने की सौ फीसद गारंटी ।

1. टिप्पणी करना छोड़ें : अगर आप हर जगह यहां वहां टिप्पणी करते हैं तो सावधान। अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझें। आपको सब ज्ञान है। अब जब आप सर्वज्ञानी हैं तो दूसरों की अज्ञान से भरी बातें न तो आप पढ़ें और न ही टिप्पणी करें। दूसरों के चिट्ठों को पढ़ने लायक ही न मानें और यदा कदा इस बात की घोषणा भी करते रहें। इससे लोग आपको सर्वज्ञानी मानने लगेंगे और लाइन लगा कर आपके यहां हिट्स पर हीट्स मिलने लगेंगे। हमारे यहां बाबाओं और स्वामियों के यहां जो भीड़ लगती है वो तो आपने देखी ही होगी।

2. हवा बाजी करें: अपने चिट्ठे पर हवा बाजी करें। जमीन से जुड़े लोगों को आजकल पिछड़ा माना जाता है। हवाबाजी से लोग अवाक हो कर आपको देखते रह जायेंगे और आप पूरे चिटठाजगत का मंच लूट कर ले जायेंगे।

3. टैक्नोराटी? वो के होवे है: आपका चिट्ठा इन टोटकों से ऊपर है। आप अच्छा लिखेंगे तो आपको नारद की भी जरूरत नहीं। लोग अपने आप पढ़ने आयेंगे आपको। अरे जो आप का लिखा न पढ़े सोचिये वो अपना कितना नुकसान कर रहा है?

4. जटिल मुद्दे: जटिल से जटिल मुद्दे उठाइये। साधारण मुद्दे आप साधारण लोगों के लिखने के लिये छोड़ दें। जितना आप जटिल मुद्दों पर लिखेंगे उतनी ही आपकी और आपके चिट्ठे की महानता बढ़ेगी। इसके लिए आप हंस कथा मासिक, वसुधा, पीपुल्स डेमोक्रेसी का नियमित अध्ययन करें और लगातार टीपते रहें.

5. जटिल भाषा: अपनी भाषा को इतना जटिल रखें कि अच्छा भला पढ़ा लिखा पाठक भी हीनभावना का शिकार हो जाये। संस्कृत के शब्दों का खुल कर प्रयोग करें। चाइनीस शब्दों का प्रयोग भी कर सकते हैं। अब आप तो जानते ही हैं कि चाइना ने कितनों को हीनभावना का शिकार बनाया हुआ है। आप जितने कम लोगों की समझ में आएंगे आपको विशेष समझने वाले व्यत्क्रमानुपात में बढ़ते जाएंगे.

6.विवाद खड़े करें: अपने चिट्ठे को हिट करने का यह आम और सर्वाधिक इस्तेमाल में लाया जाने वाला नुस्खा है। अब आपको विवाद खड़े करने के कुछ नये नुस्खे लाने होंगे जैसे की सांस लेने से कैंसर हो सकता है या पानी पीने से कैंसर हो सकता है। अब यदि कोइ इस बात का प्रतिकार करे तो पलट कर उसी पर वार करें और कहें कि तुम्ही हो जिसकी वजह से हवा और पानी की यह हालत हुई है।

7. आला तबके के लिये लिखें: आम आदमी की भाषा में आम आदमी के बारे में कभी न लिखें नहीं तो आपका चिट्ठा भी आम बन कर रह जायेगा। हमेशा आला तबके को ध्यान में रख कर लिखें।

8. ललकारें: अपने पाठकों को यदा-कदा ललकारते रहें। "हिम्मत है तो मुझे झूठा साबित करें।" "हिम्मत है तो टिप्पणी करें।" "मेरा साथ देने वाला कोइ मर्द नहीं है क्या?" इस तरह के वाक्य उछालते रहें। ग़ैरों को तुच्छ साबित करें. अपनी लाइन बड़ी करने की बजाय दूसरों की लाइन छोटी करें. जगह भरती जा रही है नयी लाइनें बनाने या बढ़ाने के लिए स्पेस कहां है?

9. दुश्मन बनायें: सफल आदमी के बहुत से दुश्मन होते हैं। आप भी अपने अधिक से अधिक दुश्मन बनायें और सफल होने का अहसास प्राप्त करें।

10. अपनी दुनिया में मस्त रहें: अपनी दुनिया में मस्त रहें, दूसरे जो भी लिख रहे हैं कान न धरें। अपने आप को हाथी समझ कर सबके बीच में से निकल जायें।

11. ऑफलाइन आपने URL का विज्ञापन दें: अपने चिट्ठे का विसिटिंग कार्ड बनायें। अखबारों में विज्ञापन दें। टीवी के टिकर में चलवायें। यदि आप अख़बार या चैनल वाले किसी दोस्त को जानते हैं तो उसे ब्लॉगजगत पर लिखने के लिए कहें और पूरी स्टोरी अपने ब्लॉग पर फोकस करवाएं।

12. विवादों से बैकलिंक: विवादों में रहने से आपको बैकलिंक मिलता है। लोग जब आपकी पोस्ट के जवाब में कुछ लिखेंगे तो आपका लिंक भी देंगे। तो आप जितने विवाद खड़े करेंगे उतनी ही आपके चिट्ठे की रेटिंग बढ़ती जायेगी।

13. टिप्पणी में सवाल करें: अव्वल तो दूसरों के ब्लॉग पर जाने से बचें. यदि चले भी गए तो दूसरों के यहां जब भी टिप्पणी करें तो पहली लाईन में पोस्ट को बेकार बतायें। फिर लिखें कि आपके बस का कुछ है नहीं। और अंत में कुछ सवाल पूछें जैसे की "बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो कभी अपने बच्चों को होमवर्क भी करवाया है।" या "तुमने कौनसे तीर मार लिये?" टाईप। इससे वो तिलमिलाएगा क्योंकि ऐसा कहने का अधिकार अब तक सिर्फ़ उसकी पत्नी को था. अब देखिये वो जवाब देने आपके चिट्ठे पर जरूर आयेगा।

14. दिन में पांच पोस्ट करें, नारद पर छा जायें: पहली से पांचवीं तक आते आते बात से पलट जायें| यानि अगर पहली पोस्ट में आपने लिखा है कि कोकाकोला पीना पूंजीवाद को बढ़ावा देता है तो पहली पोस्ट में आक्रामक तरीके से लिखें, लोगों पर हमला करें। जब माहोल गरम हो जाये तो अगली पोस्ट में थोड़ा नरम हो जायें। दिन की आखिरी पोस्ट तक आते आते सिद्ध कर दें की किस तरह कोकाकोला पीना समाजवाद को बढ़ाता है। अब पाठकों को आपस में भिड़नें दें। आपके पास अपनी पोस्टों में हर तरह के तर्क होंगे। जहां जैसा चाहें वैसा उद्धरण दिखाते हुए दूसरों को पछाड़ दें।

15. समुदाय को तोड़ो: चिट्ठाकारिता सामुदायिकता की भावना से की जाये तो ज्यादा सफल होती है। आप पहले से बने समुदाय में फूट डालें और उसी से अपने लिये नया समुदाय तैयार करें। नए गुट बनाने के लिए कई ब्लॉगरों के बीच लगाई-बुझाई की बातें करें। हो सके तो व्यक्तिगत मेल करें और बाद मे बदनाम करने के लिए उसका व्यक्तिगत मेल अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दें।

16. दूसरों की पोस्ट में नुस्ख निकालें: एक साप्ताहिक पोस्ट लिख कर पिछले सप्ताह के १० बेकार चिट्ठे बतायें। दूसरों के लिखे को बकवास बतायें और उनका मजाक उड़ायें।

17. भूल जायें कि पहले क्या कहा था: समय के साथ साथ आपके विचार भी बदलते रहने चाहियें। यकीन मानिये पाठकों की यादाश्त बहुत कम होती है। वो अकसर भूल जाते हैं कि किसी मुद्दे पर आपने पहले क्या विचार प्रगट किये थे। अपनी बात से पलट जायें कौन आपकी पिछली पोस्ट सर्च करेगा सोचिये भला?

18. टिप्पणियां चोरी करें: टिप्पणियां न मिलें तो चुरा कर छापें। कहीं से भी माल उड़ा कर अपने यहां टिप्पणी के रूप में छाप लें। जाने अनजाने नामों से या बेनामों के नाम से खुद टिप्पणियां करें। बेनाम घटिया टिप्पणियां कभी न मिटायें। जितनी हो सके सहानुभूती बटोरें।

19. गाली गलौच की भाषा में लिखें: चिट्ठा हिट करने का सबसे आसान तरीका। इंटेरनेट पर सबकुछ चलता है । नामर्द और हिजड़ा कहना तो आम है। आजकल चू------- गाली भी काफी डिमांड में है। आप अपनी भी कोई मजेदार गाली बना सकते हैं। इससे आप ज़मीन से जुड़े आम आदमी की श्रेणी में दिखाई पड़ते हैं।

20. शीर्षक का कमाल: अपने चिट्ठे का नाम 'म' से शुरू करें। या अपनी पोस्ट का शीर्षक 'म' से शुरू करें। एक और तरीका है कोई चरित्र बनायें 'म' नाम से और उसके बारे में लिखना शुरू करें। जैसे 'क' से शुरू होने वाले सीरियल टीवी पर बहुत हिट होते हैं वैसे ही 'म' से शुरू होने वाले चिट्ठे शर्तिया हिट होते हैं। अपने जीतू भाई चिट्ठा जगत में किस लिये हिट हैं? क्योंकि उनके चिट्ठे का नाम 'मेरा पन्ना' है। 'मुंबई ब्लॉग' को तो ईनाम भी मिला। आईना पर भी जब से 'मुन्नाभाई' के बारे में लिखना शुरू किया, आईना चल निकला।

इतना कुछ करने पर भी यदि आपका चिट्ठा न चले तो समझ लें आपके विचार 'निशब्द' फिल्म की तरह आज से बीस वर्ष बाद के लिये हैं, आपकी सोच को समझने वाले अभी पैदा ही नहीं हुए हैं। चिट्ठा अजर अमर है, आज अगर कोई नहीं पढ़ेगा तो बीस साल बाद आप ही का चिट्ठा सुपर हिट होने वाला है।


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35 comments:

अविनाश April 19, 2007 7:02 AM

अपने चिट्ठे का नाम ‘म’ से शुरू करें। क्‍या बात कही है। मस्‍त है आपकी बात। अमित ने सही टिप्‍पणी जोड़ी, लेकिन अफ़सोस, वे भी हिंदू-मुस्लिम विवाद को नेताओं के आजमाये नुस्‍खे की तरह ही लेते हैं।

समीर लाल April 19, 2007 9:26 AM

असीम ज्ञान की प्राप्ति हुई, हम धन्य हो गये. अब यही नुस्खे अपनाते हैं. शायद चल निकलें. :)

मैथिली April 19, 2007 10:52 AM

आप तकनीकी विषय पर तो अच्छा लिखते ही हैं, हास्य-व्यंग्य में भी मंच उखाड़ू हैं.
यह लेख बहुत पसंद आया

kakesh April 19, 2007 11:18 AM

मैने शायद जल्दी कर दी अपना चिट्ठा बनाने में . नहीं तो अपने चिट्ठे का नाम "म" से ही रखता . वैसे असीम ज्ञान की प्राप्ति हुई, हम धन्य हो गये. अब यही नुस्खे अपनाते हैं. शायद चल निकलें. देखा ना समीर जी को टिप्पणी उड़ा ली.

Gyandutt Pandey April 19, 2007 12:05 PM

अरे, ये कोई पोस्ट थोड़े ही है. ये तो आइना है. हिन्दी के ब्लॉगरों को उनकी शकल दिखा रहा है.

अभय तिवारी April 19, 2007 12:47 PM

सबसे बड़ा नुस्खा तो आप भूल गये.. चिट्ठा चिट्ठाकारिता और चिट्ठा संसार के बारे में लिखें.. चिट्ठा हिट कैसे करें इस पर लिखें.. ये ऐसा विषय है जो सब के हृदय के पास है..आज तक इस विषय पर जितनी पोस्ट आईं सब हिट रहीं.. ये ७० के दशके की सफल हिन्दी फ़िल्मों के लॉस्ट एंड फ़ाउंड फ़ार्मूले जैसा है.. हमेशा हिट होता है.. देखियेगा आप का ये पोस्ट ज़रूर हिट रहेगा..

Tarun April 19, 2007 2:06 PM

६ और ८ वें की तो गारंटी है, और म की तो खूब कही

ranjana April 19, 2007 2:24 PM

:) बहुत सरल तरीक़े बताए आपने जी :)पहले बताते तो "म" से ही कोई नाम रखते हम भी :)

masijeevi April 19, 2007 2:41 PM

चलिए आपका नुस्‍खा ही अपनाते हैं। ये टिप्‍पणी आपके नुस्‍खे पर ही आधारित है (आप ही ने तो व्‍यक्तिगत मेल करके ऐसी टिप्‍पणी लिखने के लिए कहा था इसलिए बुरा न मानें)

अबे। कुछ लिखना विखना भी आता है कि ऐसे ही ....? मेरा चिट्ठा भी म नाम से है कोई कुत्‍ता भी नहीं झांकता। मुश्किल भाषा में लिखता हूँ बकवास विषयों पर लिखता हूँ पर कोई नुस्‍खा काम नहीं आता। बिल्‍कुल नहीं पढ़ना दोस्‍तो इन नुस्‍खों को- बदले के लिए मेरे चिट्ठे पर आएं

ठीक है न। कोई कमी तो नहीं है न टिप्‍पणी में। नहीं तो फिर से ईमेल कर दो सुधार कर देंगे :)

सुरेश चिपलूनकर April 19, 2007 4:25 PM

एकदम बकवास चिठ्ठा है... दम है तो मेरे चिठ्ठे पर आकर टिप्पणी करके दिखा...
एक से बढकर एक चिठ्ठे देखे लेकिन इस जैसा नहीं देखा...
(क्यों आईना भाई यह ठीक है ना...कम से कम आप तो मुझे याद रखेंगे ही :) मान गये आपको...हम तो अब तक भाड़ ही झोंक रहे थे... अब दो-चार चिठ्ठों पर जाकर गरिया आऊँ... फ़िर बात करता हूँ...

प्रियंकर April 19, 2007 4:50 PM

नुस्खा कारगर साबित हुआ. बधाई!

Sanjeet Tripathi April 19, 2007 6:10 PM

"दम हो तो आओ हमारे चिट्ठे पर कभी"।
अफ़सोस-अफ़सोस , मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि मैंने चिट्ठा बनाने में जल्दी कर दी या फ़िर आपने यह रचना लिखकर मार्गदर्शन करने में देर कर दी।
बढ़िया रचना

जीतू April 19, 2007 9:07 PM

ये सही किया, अब "म" वाले चिट्ठे ज्यादा होगे। लोगो ने आजमाना शुरु भी कर दिया है। अफवाहें मत फैलाया करो।

कुछ प्वाइंट हम भी बता देते है :

१. बदनाम होंगे तो क्या नाम ना होगा! वाली कहावत को चरितार्थ करिए। लोग पूरब दिशा की बात करें आप पश्चिम की बात करो। लोग झक मारकर आपके ब्लॉग पर आएंगे। टिप्पणी करेंगे नही तो गरिआएंगे,जुतियाएंगे पक्का । फिर दोबारा देखने आएंगे, कि किसी ने उनकी कमेंट पर कमेंट की है कि नही।
२. सवाल पूछें, पाठकों से सवाल पूछें। कल्लू की भैंस गुमगयी, कहाँ रपट कराएं? जवाब तो मिलबे करि। कोई बोलेगा,
३. रिसर्च के पन्ने लिखें।
४. हिट साइटों की सूची लिखें ( लोग अपना नाम पढने आएंगे, जो अपना नाम पाएंगे, वाह वाह करेंगे जो नही पाएंगे, गरिआएंगे, पक्षपात का आरोप लगाएंगे।)
५. आखिरी लेकिन महत्वपूर्ण, गूगल चैट पर सभी चिट्ठाकारों का हिसाब किताब रखें, जैसे ही कोई दिखे, दन्न से पकड़ लें, इससे पहले कि वो आपको ब्लॉग पढाए, आप लिंक पटक दो। और टिप्पणी का तगादा करो। या तो बन्दा आनलाइन आना छोड़ेगा, या ब्लॉग पढना। दोनो मुश्किल है, इसलिए टिप्पणी देकर, टरकना ज्यादा मुफीद होगा, इसलिए आपके चांसेस ब्राइट है।

संजय बेंगाणी April 19, 2007 9:36 PM

बकवास...ये मेरी आइडीया थी आपने चुरा ली. कभी दो लाइन भी ठीक से लिखी है. लिखना सीखना हो तो मेरे चिट्ठे को पढ़े, लिंक साथ में है.
पता नहीं कौन कौन घूस आया है, चिट्ठाकारी में. ज्ञानी बने फिरते है.
फूरसतीया, समीरलाल, सुनील दिपक जैसे ही फालतू चिट्ठाकार है आप.
अब स्माइली क्या खोज रहे है? दी नहीं तो मिलेगी कहाँ से.

सुनीता(शानू) April 19, 2007 10:26 PM

बहुत अच्छा भाई मेरा चिट्ठा तो ’म’ से ही है,...

संजय बेंगाणी April 19, 2007 10:46 PM

ईस्माइल पलीज. :)

नीरज दीवान April 20, 2007 12:39 AM

नया नुस्खा जोड़ो-
खुद को धर्मनिरपेक्षता का सच्चा हिमायती साबित करने के लिए धर्म को गालियां दो, लोगों की आस्थाओं को खोखला साबित करो. हो सके तो भारतीय संविधान और क़ानून से ऊपर उठकर और मुंह आसमां में उठाकर गालियां दो. आप बुद्धिजीवी की श्रेणी में आओगे.
हां ज़रा बचकर.. ऐसे धर्म को निशाना बनाना जहां सहूलियत हो. वरना 'हंस' विवेकी साथ नहीं देंगे. अधर में छोड़ देंगे.

हिन्दी चिट्ठाकार बन्धु ध्यान दें « छुट-पुट April 20, 2007 1:57 AM

[...] तो भटिया जी ने हिट्स पाने के बीस तरीके बतायें हैं लगता है कि यह इक्कीसवां तरीका [...]

गौरी,  April 20, 2007 2:09 AM

सारे विकल्प खत्म कर दिए आपने तो चिट्ठा हिट कराने के...
सारे राज फाश...
लेकिन,व्यंग्य अच्चा है। कृपया मस्ती की बस्ती के लिए भी लिखें...
देखा, इसी बहाने "म " से शुरु होने वाले अपने चिट्ठे का प्रचार भी कर लिया।

Raman Kaul April 21, 2007 2:16 AM

अब यहाँ नीचे तक आ गया हूँ तो टिप्पणी छोडे जा रहा हूँ। वरना मैं तो पहला नुस्खा पढ़ते ही बैक बटन दबाने वाला था। फिर रोचक लगा तो पढ़ता ही चला गया। बहुत अच्छी पोस्ट। एक और टिप - अपने MyBlogLog फेहरिस्त में फिरंगियों की फोटो लगाएँ। उस से हम भारतीय पाठक यह सोच कर आएँगे कि इसे तो विदेशी भी पढ़ते हैं। :-)

श्रीश शर्मा 'ई-पंडित April 21, 2007 3:23 AM

बड़े आए चिट्ठा हिट करने के नुस्खे देने वाले, तुमने कौनसे तीर मार लिये ?, बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो कभी अपने बच्चों को होमवर्क भी करवाया है, बिटिया बेचारी परेशान है कि "टैस्ट ने छीना रैस्ट हमारा"

मैं तो आज के बाद तुम्हारे चिट्ठे पर टिप्पणी नहीं करने वाला हाँ।

ऊपर लोगों को देखो बकवास टिप्पणियाँ किए जा रहे हैं, किसी को कुछ लिखना-विखना आता नहीं, बेमतलब की ही ही करके कलम घसीटे जाते हैं। मैं तो अब से आला तबके के लिए ही लिखूँगा। किसी को ढंग से लिखना सीखना हो तो मेरे चिट्ठे को आकर पढ़े।

क्या किसी को मेरी बातों से दिक्कत है, हिम्मत है तो मुझे झूठा साबित करें, हिम्मत है तो मेरे चिट्ठे पर आकर टिप्पणी करें। अच्छी तरह देख लूँगा, हाँ!

Shrish April 21, 2007 3:26 AM

बड़े आए चिट्ठा हिट करने के नुस्खे देने वाले, तुमने कौनसे तीर मार लिये ?, बड़ी बड़ी बातें कर रहे हो कभी अपने बच्चों को होमवर्क भी करवाया है, बिटिया बेचारी परेशान है कि "टैस्ट ने छीना रैस्ट हमारा"

मैं तो आज के बाद तुम्हारे चिट्ठे पर टिप्पणी नहीं करने वाला हाँ।

ऊपर लोगों को देखो बकवास टिप्पणियाँ किए जा रहे हैं, किसी को कुछ लिखना-विखना आता नहीं, बेमतलब की ही ही करके कलम घसीटे जाते हैं। मैं तो अब से आला तबके के लिए ही लिखूँगा। किसी को लिखना सीखना हो तो मेरे चिट्ठे को आकर पढ़े।

क्या किसी को मेरी बातों से दिक्कत है, हिम्मत है तो मुझे झूठा साबित करें, हिम्मत है तो मेरे चिट्ठे पर आकर टिप्पणी करें। अच्छी तरह देख लूँगा, हाँ!

Shrish April 21, 2007 3:30 AM

एक और लाजवाब पोस्ट जगदीश भाई। हँस-हँसकर दोहरा हो गया। यह सोचकर आया था कि आप वो प्रचलित टिप्स टाइप दे रहे हो पर यहाँ तो उससे भी काम की चीज मिली। इसे डिलीशियस पर टैग कर लिया है।

ऊपर अभय तिवारी और मसिजीवी की टिप्पणी भी पठनीय है। संजय भाई की टिप्पणी भी बहुत मजेदार रही। :)

गिरिराज दत्त हर्ष April 21, 2007 1:13 PM

'म' से मुन्ना भाई तो आईना पर लाये, उसमें क्या नया था ? आज कल तो जहां देखों - मुन्ना भाई ही नजर आते हैं ।
मुन्ना भाई ब्राण्ड तो पहले से ही हिट था । और रही बात 'मेरा पन्ना' की तो 'म' से मेहनत से मुकाम हासिल किया होगा - 'म' से नहीं । तो सभी टिप्प्णीकारों से कहना चाहूंगा कि 'म' से माथापच्ची करने की बजाय मन लगाकर मेहनत से लिखों तो शायद हिट हो जाओ ।

जगदीश भाटिया April 21, 2007 2:42 PM

तारीफ के लिये आप सभी का शुक्रिया।

@ गिरिराज दत्त हर्ष

म वाला नुस्खा मेरे कुछ खास मित्रों के लिये था। बाकी 19 नुस्खों के लिये भी आप अपने विचार बताते तो बेहतर था।

हरिराम April 21, 2007 6:29 PM

अब तक तो और अनेक नुस्खे आ गए होंगे आपके तेज दिमाग में... उन्हें भी अगली कड़ी में लिख डालिए।

अतुल शर्मा April 21, 2007 9:33 PM

ये क्या लगा रखा है भाटियाजी, मैं दो दिन नेट से दूर रहा और इधर आपने प्रवचन की दुकान खोल ली। अरे मेरा चिट्ठा तो सालभर से 'म' से चिट्ठा चला रहा हूँ। 'म' से क्या होता है, मुझको तो लोग और टिप्पणी ढूँढना पड़ती हैं हेलोजन जलाकर। वो तो फिल्मी चिट्ठे लिखे तो आप पता नहीं क्या सोच कर उधर टहल आए और लिख दिया 'मजेदार है अतुलजी'। अरे ये भी कोई तरीका हुआ टिप्पणी देने का। टिप्पणी देखना है तो ऊपर संजय बेंगाणी से सीखिए।
:-) :-)
अरे भैया बहुत ही ग़ज़ब लिखा है आपने। :-)

How Do We Know April 23, 2007 4:54 AM

bhai wah!! kuchh samay pehle aapne kaha tha kli aap ye nuskhe batayenge.. Dhanyavaad! lekin Dekhiye, humein apna chittha popular karne ki koi lalsa nahi hai, tippani karne baith gaye!

अथ श्वानगाथा: Dogma of Dogs « मालव संदेश April 25, 2007 5:44 PM

[...] सभी चिट्ठाकारों को आईना दिखा कर चिट्ठा हिट करने के नुस्खे बता रहे थे। इनके 20 वें नंबर के नुस्‍खे [...]

Rohit Tripathi May 28, 2007 5:52 PM

क्यों अपना समय खराब कर रहे है फ़ालतू की बातें लिख कर, कुछ तो अपनी उम्र की चिन्ता करो दोबारा मत लिखना ऐसी फालतू की बातें,

Rohit Tripathi May 28, 2007 5:54 PM

माफ़ कीजियेगा परंतु आपने ही बताया की ऐसा करने से चिठ्ठा हिट होता है :-)

क्या खोजते हुए आते हैं ’आईना’ पर लोग « आईना March 5, 2008 1:03 AM

[...] चिट्ठा हिट करने के 20 नुस्खे Filed under: Blog Promotion, काम की बात, सूचना   |   [...]

best website hosting June 16, 2011 10:14 AM

हिन्दी में पोस्ट लेख या फिर अंग्रेजी ही हर कोई समझ सकता हूँ. इस तरह से पोस्ट करके, केवल हिन्दी के लोगों को समझ सकता हूँ. यह दूसरों के लिए उपयोगी नहीं है. यह मेरा अनुरोध है.

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