पाकिस्तान के हीरो
यश साहब ने अपनी फ़िल्म वीरजारा में एक गीत रखा साहब
"जैसा देश है तेरा वैसा देश है मेरा"
अब अपना भारत जैसा भी है पाकिस्तान जैसा तो कतई नहीं है।
पिछले दिनों हमारे चिट्ठा जगत में जम कर भारत की तुलना अमेरिका से की गई। बहुत लोगों की भुजाएं फड़कीं साहब। हमें तो इस बात से ही खुशी मिली कि चलो अब हमारी तुलना अमेरिका जैसे देशॊ से होने लगी है। बहुत लोगों को इस तुलना पर भी आपत्ती होने लगी। मगर जब भारत की तुलना पाकिस्तान से की गई, तुलना क्या भारत को पाकिस्तान जैसा बताया गया तो किसी ने आपत्ती नहीं की।
आप बताइये क्या आजाद भारत का कोई भी लीडर विदेशॊं में भाग कर छुपा है? इमेरजेंसी में भी? चाहे जैसे भी हों, यह तो हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारे लीडर दुम दबा कर भागने के बजाये यहीं मरना ज्यादा पसंद करेंगे|
आज मैंने सुना कि पाकिस्तान में एक टीवी कार्यक्रम के बिलबोर्ड पर अमिताभ बच्चन के पीछे पाकिस्तानी झंडा देख वहां के हुक्मरानों ने आपत्ती कर दी कि हमारे झंडे के आगे छापने के लिये हमारे अपने हीरो बहुत हैं और सुना है कि इन बोर्डों को अब हटाया जा रहा है। हटाईये, हटाईये। यूं तो कला या कलाकार कभी सीमाओं में नहीं बंध सकते और अपने चाहने वालों का आदर करते हैं, चाहे वो किसी भी देश के हों मगर शायद पाकिस्तानी झंडे के साथ फोटो खिंचवाना या छपवाना अमिताभ की अपनी प्राथमिकताओं मॆं भी न हो।
10 comments:
“जैसा देश है तेरा वैसा देश है मेरा”
जगदीश जी, उपर्युक्त गीत का भाव आप को समझ नही आया या कि आप समझना नहीं चाहते?
मिश्र जी
मेरी समझ में गीत का भावार्थ मोहिंदर अमरनाथ एक बार जावेद मियाँदाद को सुना चुके हैं, यह जावेद ने अपनी किताब में कबूल भी किया है। जावेद स्लेजिंग करते करते भअरत के खिलाफ कुछ कह बैठै। मोंहिदर ने तुरँत पलटकर कहा "देखो जावेद, तुम्हें मेरे खिलाफ कुछ कहना हो तो चलेगा, लेकिन मेरे देश की बुराई मैं नही सुन सकता।" तब जावेद को अहसास हुआ कि मोंहिदर या अन्य कोई भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तान को भलाबुरा नही कह रहा था। यही इस गीत का भावार्थ है कि " मेरे पड़ोसी, जैसे तुझे अपना देश प्यारा है वैसे ही मुझै अपना।"
अतुल जी, आपने बिलकुल सही कहा।
यही इस गीत का भाव है, न कि तुलनात्मक।
राजा भोज और गंगु तैली के बीच क्या तुलना करनी.
देखिए... पाकिस्तान की जगह भारत होता तो वह भी तिरंगे के आगे किसी पाकिस्तानी कलाकार (कोई है भी क्या) को सहन नही करता
जी हां मिश्र जी, मैंने जानबूझ कर गीत के शाब्दिक अर्थों को लिया है।
और पंकज जी मैंने बिलबोर्ड को हटाये जाने पर कोई आपत्ती नहीं की है।
अगर आप पोस्ट के शीर्षक को देखें तो समझ जायेंगे कि मैं व्यंग कर रहा था उनकी इस बात पर कि झंडे के साथ छापने के लिये हमारे अपने हीरो बहुत हैं।
अरे हमारे तो गोविंदा भी उनके किसी अपने हीरॊ से ज्यादा लोकप्रिय होंगे पाकिस्तान में, फिर अमिताभ तो सच के भी हीरो है हमारे, लोग पूजते भी हैं उनको ।
कोई भी समाज, धर्म या देश अपने आदर्श पुरुषों से हमेशा प्रभावित होता है।
कौन हैं पाकिस्तान के हीरो?
एक राष्ट्रपति जो एक जनता द्वारा चुने हुये प्रधानमंत्री को जबरन हटा राष्ट्रपति बन गया?
एक प्रधानमंत्री जो अपनी जान बचाने के लिये रातों रात पतली गली से निकल गया अपने वोटरों को अपने हालात पर छोड़ कर?
वो लोग जिन्हें छुपा रखा है अपनी पश्चिमी सीमा पर?
एक परमाणू वैज्ञनिक जिसे सब स्मगलर के रूप में जानते हैं?
अरे पहले उन्हे अपने हीरो गढ़ तो लेने दीजिये, फिर बात करेंगे।
ताजा समाचारों के अनुसार पोस्टरों से झंडा हट गया है, अमिताभ कायम हैं।
हाँ झन्डा तो हट गया है लेकिन अमिताभ वहाँ के बिलबोर्ड्स पर बरकरार है, लेकिन सबसे मजेदार बात ये है कि इस कम्पनी ने ना तो अमिताभ को इस बिलबोर्ड के लिए कान्ट्रेक्ट किया और ना ही कान्टेक्ट किया। मतलब मुफ़्त का चन्दन घिस रघुनन्दन वाला मामला है। अमित जी, ठोक दो एक केस, कुछ तो मिलेगा ही, आपके पास टाइम ना हो तो अमर सिंह तो है ही ना।
कमाल हैं! क्या बच्चन एक राष्ट्रध्वज से ज्यादा लोकप्रिय हो गये हैं? धन्य हैं वो देश.
हमारे यहाँ तो बखेड़ा खड़ा हो जाता.
काहे केस वेस करवाते हो भाई, पता तो चला वहाँ के झंडे की किमंत क्या हैं.
जय-हिन्द ;)
भाई मैं ने सब पढ लिया ज़ोर लगा कर - आपसे एक गुज़ारिश है आपके ब्लॉग का फॉंट बहुत छोटा है कृपया टम्पलीट बदलें या फिर फॉंट बडा करें
वन्देमातरम्
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